👉9 अगस्त 1945 को नागासाकी के बजाय अमेरिका 'कोकुरा' में परमाणु बम गिराने वाला था....(नागासाकी 75वीं वर्षगांठ)!!
कोकुरा, 1945 में जापान में परमाणु बम विस्फोटों के लिए चुने गए लक्ष्यों में से एक था, लेकिन ये शहर चमत्कारिक ढंग से द्वितीय विश्व युद्ध के दिनों की भीषण तबाही से बच गया।
➡️जुलाई 1945 के मध्य में अमरीकी सेना के अधिकारियों ने जापान के कई शहरों को चुना जहाँ परमाणु बम गिराये जा सकते थे,ये वो शहर थे जहाँ फैक्ट्रियाँ और सैन्य अड्डे थे।कोकुरा प्राथमिकता के क्रम में सिर्फ़ हिरोशिमा से पीछे था,यानी सूची में हिरोशिमा के बाद उसका नाम था।काकुरा हथियार उत्पादन का बड़ा केंद्र था, यहाँ जापान की सबसे बड़ी और सबसे ज़्यादा गोला-बारूद बनाने वाली फैक्टरियाँ थीं।काकुरा में जापान की सेना की एक बहुत बड़ी आयुधशाला भी थी।
➡️6 अगस्त को हिरोशिमा पर परमाणु बम गिरने के 3 दिन बाद बी-29 बमवर्षक सुबह-सुबह कोकुरा के लिए उड़े, उनमें से एक पर फ़ैट मैन(plutonium atom bomb) लदा हुआ था जो हिरोशिमा पर गिराये गए यूरेनियम बम से भी अधिक शक्तिशाली एक प्लूटोनियम बम था।
↪️लेकिन कोकुरा के ऊपर बादलों का डेरा था, धुआँ भी हो गया था क्योंकि पूरे जापान में हवाई हमले लगातार हो रहे थे, तब कोकुरा के कारखानों ने जानबूझकर कोयला जलाया था ताकि पूरे शहर में एक समय में एक स्मोक स्क्रीन बनाई जा सके।
↪️अमरीकी सैन्य दस्तावेज़ों के अनुसार बी-29 बमवर्षकों ने तीन बार कोकुरा का चक्कर लगाया था।अमेरिकी आदेश था कि बम तभी गिराया जाये जब टारगेट दिख रहा हो, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा नुक़सान हो सके।ऐसी स्थिति में बी 29 बमवर्षक विमान ने नागासाकी की ओर बढ़ने का निर्णय लिया और कोकुरा बच गया।
↪️कोकुरा शहर अब अस्तित्व में नहीं है,ये उन नगरपालिकाओं में से एक था जिन्हें 1963 में मिलाकर एक नया शहर कीटाक्यूशू बना दिया गया, जिसकी आबादी 10 लाख से कुछ कम है।


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